सीजी भास्कर, 2 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ के खेतों, गांवों और छोटे उद्योगों में तैयार होने वाले उत्पाद अब विदेशी बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने निर्यात नीति (Chhattisgarh Export Promotion Policy 2026-30) को मंजूरी दी है। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में मार्च 2030 तक राज्य के वस्तु निर्यात को दोगुना करने और देश के कुल वस्तु निर्यात में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य के निवेश पोर्टल पर नीति का आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराया गया है। नीति में बड़े उद्योगों के साथ छोटे कारोबारियों और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को भी जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसके लिए लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, क्रेडिट इंश्योरेंस और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने में आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
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छोटे कारोबारियों को मदद
नई निर्यात नीति (Chhattisgarh Export Promotion Policy 2026-30) में छोटे उद्यमियों के लिए कई तरह की सहायता का प्रावधान है। निर्यात क्रेडिट इंश्योरेंस के लिए 5 लाख रुपए तक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए 2 लाख रुपए तक और छत्तीसगढ़ के आईसीडी के उपयोग पर निर्यात लॉजिस्टिक्स के लिए 20 लाख रुपए तक सहायता दी जाएगी। यूनिट से आईसीडी तक शुरुआती परिवहन लागत में भी 50 फीसदी सहयोग का प्रावधान है। इससे उन कारोबारियों को मदद मिल सकती है, जो उत्पाद तैयार करने के बाद परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बिक्री की लागत के कारण निर्यात शुरू नहीं कर पाते।
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बस्तर-सरगुजा को अतिरिक्त लाभ
बस्तर और सरगुजा संभाग में स्थापित उद्यमों के अलावा महिला उद्यमियों, एससी-एसटी, भूतपूर्व सैनिक, अग्निवीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और दिव्यांगजन से जुड़े निर्यातकों को प्रोत्साहनों पर 10 फीसदी अतिरिक्त लाभ देने का प्रावधान किया गया है। ओडीओपी यानी एक जिला, एक उत्पाद और जीआई उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग तथा निर्यात पैकेजिंग के लिए 15 लाख रुपए तक सहायता का प्रावधान है। पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को पंजीकरण लागत का 75 फीसदी सहयोग और जीआई आवेदन या पंजीयन के लिए 2 लाख रुपए तक सहायता मिलेगी।
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ई-कॉमर्स से ग्लोबल बाजार
ई-कॉमर्स सहायता (Chhattisgarh Export Promotion Policy 2026-30) का फायदा छोटे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचने में मिल सकता है। स्थानीय उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेचने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें पैकेजिंग, प्रमाणन, परिवहन और डिजिटल बिक्री जैसे खर्चों को ध्यान में रखा गया है। यानी गांव या कस्बे में तैयार उत्पाद को विदेशी खरीदार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को एक साथ मजबूत करने की कोशिश है।
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बनेगा एक्सपोर्ट इंटेलिजेंस सेल
नीति में एक्सपोर्ट इंटेलिजेंस सेल (Chhattisgarh Export Promotion Policy 2026-30) बनाने का प्रावधान है। यह सेल अलग-अलग देशों में उत्पादों की मांग, शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं और मुक्त व्यापार समझौतों से जुड़े अवसरों की जानकारी देगा। निर्यात प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, गुणवत्ता मानक और प्रमाणन को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने वाले निर्यातकों को भी सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
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युवाओं के लिए नए अवसर
निर्यात बढ़ने के साथ पैकेजिंग, क्वालिटी टेस्टिंग, डिजिटल मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और दस्तावेजीकरण जैसे क्षेत्रों में काम बढ़ सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर युवाओं और छोटे सेवा कारोबारियों के लिए अवसर बनने की संभावना है। किसान उत्पादक समूह, हस्तशिल्प से जुड़े समूह, महिला उद्यमी और स्थानीय उत्पाद बनाने वाले छोटे कारोबारियों को भी विदेशी बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
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किन उत्पादों की हिस्सेदारी
राज्य के आधिकारिक निर्यात पोर्टल के अनुसार छत्तीसगढ़ के प्रमुख निर्यात उत्पादों में परबॉयल्ड चावल, फेरो-सिलिको-मैंगनीज, लौह एवं इस्पात, टूटे चावल, स्मार्टफोन, एल्युमिनियम और खाद्य तेल जैसे उत्पाद शामिल हैं। राज्य से होने वाले निर्यात में कृषि, खनिज आधारित उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। अब नई नीति के जरिए स्थानीय और मूल्यवर्धित उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
निर्यात का नया लक्ष्य
निर्यात लक्ष्य (Chhattisgarh Export Promotion Policy 2026-30) के तहत मार्च 2030 तक वस्तु निर्यात को 2025-26 के स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य है। साथ ही देश के कुल वस्तु निर्यात में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। राज्य सरकार के निवेश पोर्टल के अनुसार छत्तीसगढ़ के निर्यात में चावल, लौह-इस्पात, एल्युमिनियम, इंजीनियरिंग और अन्य उत्पादों की हिस्सेदारी है। राज्य के लिए अलग-अलग जिलों के District Export Action Plans भी उपलब्ध कराए गए हैं।
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