सीजी भास्कर, 12 सितम्बर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 6 दिन की रिमांड मंजूर की गई। चेतन बोरघारिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के रूप में काम कर चुके हैं। (CGPSC Case)
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि चेतन बोरघारिया और मामले के आरोपी कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर के बीच वॉट्सऐप पर बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर उनसे भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर पूछताछ की जा रही है।
दस दिन पहले ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई : CGPSC Case
गिरफ्तारी से करीब दस दिन पहले जांच एजेंसी ने चेतन बोरघारिया से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की थी। धमतरी स्थित उनके आवास पर तलाशी ली गई थी, जबकि बलरामपुर में भी उनसे पूछताछ की गई थी। इसके बाद अब उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया।
इस मामले में कुछ दिन पहले उत्कर्ष चंद्राकर को अदालत में पेश किया गया था। जांच एजेंसी ने उसकी रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की थी, जिसके बाद अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

तीन करोड़ से ज्यादा वसूली का आरोप
जांच में आरोप सामने आए हैं कि अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए लिए गए। उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका कथित तौर पर अभ्यर्थियों तक प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र पहुंचाने से जुड़ी बताई गई है।
आरोप (CGPSC Case) है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद और प्रारंभिक परीक्षा से साक्षात्कार तक सफलता की गारंटी देने का दावा किया। इसके बदले अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपए से अधिक की रकम वसूले जाने की बात जांच में सामने आई है।
जांच एजेंसी का दावा है कि अभ्यर्थियों से पैसे जुटाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे OSD के नाम और प्रभाव का भी इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को प्रभावित करने की बात सामने आई है।
2020 से 2022 की भर्ती प्रक्रिया जांच के घेरे में : CGPSC Case
यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार में पारदर्शिता के नियमों को दरकिनार कर प्रभावशाली परिवारों से जुड़े अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर चयनित कराया गया।
मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान तत्कालीन आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति की गिरफ्तारी हो चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय कथित धन लेनदेन और कैश नेटवर्क की भी जांच कर रहा है।
जांच एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट से जुड़े करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए हैं। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के अलावा गैर सरकारी संगठनों, कंपनियों और रिसॉर्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए हैं। जांच का मुख्य फोकस कथित तौर पर वसूली गई रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल से जुड़ी कड़ियों का पता लगाना है।


